एमबीए रूरल मैनेजमेंट कोर्स क्या है? – पूरी जानकारी हिंदी में
परिचय
एमबीए रूरल मैनेजमेंट कोर्स एक विशेष प्रकार का प्रबंध कोर्स है जो ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और प्रबंधन पर केंद्रित होता है। यह कोर्स उन छात्रों के लिए बनाया गया है ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान देना चाहते हैं। इस कोर्स के माध्यम से छात्रों को ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान प्रदान किया जाता है।
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एमबीए रूरल मैनेजमेंट कोर्स क्या है?
एमबीए रूरल मैनेजमेंट कोर्स की एक दो साल का स्नातक प्रोग्राम है जो ग्रामीण क्षेत्र के प्रबंधन और विकास पर केंद्रित होता है। इस कोर्स में छात्रों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि प्रबंधन, ग्रामीण वित्त, ग्रामीण विपणन, ग्रामीण विकास योजनाओं का सामाजिक उद्यमिता जैसे विषयों की गहन जानकारी प्रदान की जाती है। यह कोर्स छात्रों को ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने के लिए तैयार करता है और उन्हें सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों में नौकरी के अवसर प्रदान करता है।
एमबीए रूरल मैनेजमेंट कोर्स के लिए योग्यता
एमबीए रूरल मैनेजमेंट कोर्स में प्रवेश पाने के लिए छात्रों को कुछ योग्यताओं को पूरा करना होता है। ये योग्यता निम्नलिखित है:
शैक्षणिक योग्यता: छात्रों को किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री प्राप्त कर होनी चाहिए। न्यूनतम स्नातक में न्यूनतम 50% अंक होने चाहिए।
प्रवेश परीक्षा: अधिकांश संस्थान एमबीए प्रोग्राम में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करते हैं। छात्रों को CAT, MAT, XAT, CMAT या अन्य प्रवेश परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने होते हैं।
साक्षात्कार और समूह चर्चा: कुछ संस्थान प्रवेश परीक्षा के साक्षात्कार और समूह चर्चा का आयोजन करते हैं। छात्रों को इन चरणों में भी अच्छा प्रदर्शन करना होता है।
एमबीए रूरल मैनेजमेंट कोर्स के पाठ्यक्रम
एमबीए रूरल मैनेजमेंट कोर्स का पाठ्यक्रम 2 साल का होता है और इसे 4 सेमेस्टर में विभाजित किया गया जाता है। प्रत्येक सेमेस्टर में छात्र को विभिन्न विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। पाठ्यक्रम के मुख्य विषय निम्नलिखित है:
पहले वर्ष
प्रबंधन के सिद्धांत: इस विषय में छात्रों को प्रबंधन के मूल सिद्धांत और अवधारणाओं की जानकारी दी जाती है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था: इस विषय में ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति और उनके विकास के तरीकों की जानकारी दी जाती है।
कृषि प्रबंधन: इस विषय में कृषि उत्पादन, कृषि विपणन और कृषि वित्त के बारे में पढ़ाया जाता है।
ग्रामीण वित्त: इस विषय में ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं और उनके प्रबंधन की जानकारी दी जाती है।
दूसरा वर्ष
ग्रामीण विपणन: इस विषय में ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादकों और सेवाओं के विपरण के तरीकों की जानकारी दी जाती है।
ग्रामीण विकास योजनाएं: इस विषय में सरकारी और गैर-सरकारी संगठन द्वारा चलाई जा रही ग्रामीण विकास योजना की जानकारी दी जाती है।
सामाजिक उद्यमिता: इस विषय में सामाजिक उद्यमिता के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र के विकास के तरीकों की जानकारी दी जाती है।
प्रोजेक्ट वर्क: दूसरे वर्ष के अंत में छात्रों को एक प्रोजेक्ट वर्क करना होता है जिसमें उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों की किसी समस्या का समाधान ढूंढना होता है।
एमबीए रूरल मैनेजमेंट कोर्स के लिए शीर्ष संस्थान
भारत में कई प्रशिक्षित संस्थान है जो एमबीए रूरल मैनेजमेंट कोर्स की पेशकश करते हैं। इसमें से कुछ प्रमुख संस्थान निम्नलिखित है:
इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट आदंक: यह संस्थान गुजरात में स्थित है और रूरल मैनेजमेंट के क्षेत्र में अग्रणी माना जाता है।
जेवियर स्कूल ऑफ रोलर मैनेजमेंट: यह संस्थान उड़ीसा में स्थित है रूरल मैनेजमेंट के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान करता है।
नेशनल इंस्टीट्यूट आफ रूरल डेवलपमेंट एंड पंचायती राज: यह संस्थान हैदराबाद में स्थित है और ग्रामीण विकास और पंचायती राज के क्षेत्र में विशेष विशेषज्ञ रखता है।
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस: यह सांसद मुंबई में स्थित है और सामाजिक विज्ञान और रूरल मैनेजमेंट के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्रदान करता है।

आईआईएम लखनऊ
नेताजी सुभाष चंद्र विश्वविद्यालय, जमशेदपुर इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट, आनंद (आईआईएम)
रूरल मैनेजमेंट कोर्स के बाद करियर कैरियर ऑप्शन
एमबीए रूरल मैनेजमेंट कोर्स पूरा करने के बाद छात्रों के विभिन्न कैरियर अवसर उपलब्ध होते हैं। यह अवसर निम्नलिखित है:
सरकारी संगठन: छात्र सरकारी संगठनों जैसे नाबार्ड, राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान और ग्रामीण विकास मंत्रालय में नौकरी पा सकते हैं।
गैर-सरकारी संगठन(NGO): छात्र के गैर-सरकारी संगठनों में काम कर सकते हैं जो ग्रामीण विकास और सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में काम करते हैं।
कॉरपोरेट सेक्टर: कुछ कॉरपोरेट कंपनियां भी ग्रामीण क्षेत्रों में अपने व्यवसाय का विस्तार कर रही है और वे रूरल मैनेजमेंट के विशेषकों की मांग करती हैं।
सामाजिक उद्यमिता: छात्र अपना खुद का सामाजिक उद्यम शुरू कर सकते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के लिए काम कर सकते हैं।
एमबीए रूरल मैनेजमेंट कोर्स के फायदे
एमबीए रूरल मैनेजमेंट कोर्स के कई फायदे हैं जो उसे छात्रों के लिए आकर्षक बनाते हैं। ये फायदे निम्नलिखित हैं:
ग्रामीण विकास में योगदान: यह कोर्स छात्रों को ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में योगदान देने का अवसर प्रदान करता है।
व्यापक करियर के अवसर: इस कोर्स के बाद छात्रों के लिए सरकारी और गैर-सरकारी, कार्बोनेट सेक्टर में करियर के अवसर उपलब्ध होते हैं।
सामाजिक उद्यमिता: यह कोर्स छात्रों को सामाजिक उद्यमिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रेरित करता है।
उच्च वेतन: इस कोर्स के बाद छात्रों को उच्च वेतन और अच्छे कैरियर के अवसर मिलते हैं।
एमबीए रूरल मैनेजमेंट के लिए फीस और वेतन
एमबीए रूरल मैनेजमेंट की फीस और वेतन 5 लाख से 10 लख रुपए के बीच होती है। इस कोर्स के बाद शुरुआती वेतन 3 लाख से 12 लख रुपए प्रति माह तक हो सकता है, जो आपके अनुभव और कौशल पर निर्भर करता है।
निष्कर्ष
एमबीए रूरल मैनेजमेंट कोर्स एक उत्कृष्ट विकल्प है उन छात्रों के लिए जो ग्रामीण क्षेत्र के विकास में योगदान देना चाहते हैं। यह कोर्स छात्रों को ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान प्रदान करता है। इस कोर्स के बाद छात्रों के लिए विभिन्न करियर के अवसर उपलब्ध होते हैं और वे सरकारी, गैर-सरकारी और कॉरपोरेट सेक्टर में नौकरी पा सकते हैं। यदि आप ग्रामीण विकास में रुचि रखते हैं तो रूरल मैनेजमेंट कोर्स को आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है।